तुझको पाने की बेताबी.....🌹🌹


खो गयी है हर झिझक,
तुझको पाने की ही है ललक,
बेकसी के दाग, दामन
कर रहा है तर - बतर
वो हर जफ़ा संगीन हो,
मुझसे , तुझको
जो कर रही है बेखबर……!

न मैं,
हो सकूँ तुंझसे खफा,
ना तू बन सके मेरा हमसफ़र,
आगाज तेरा हो रहा है,
तेरी कमी फिर भी मगर,
चाहतों की आश में
दिल फिर रहा है दर - बदर……!!

बिन अश्क नम आँखे हुयीं,
सिवाय इश्क, सब बातें हुयीं
कुदरतन तेरी चाह है,
दिल माँगे तेरी पनाह है,
तू करे या ना करे
है मुझको तेरी ही फिकर,
फिर भी बाकी है कसर……!!!

इस खलिश को क्या कहूँ,
तेरी चाह को क्या नाम दूँ,
तू जानता है मुझको भी,
तेरे बिन नहीं मेरा बसर,
तेरे आगोश की अब चाह है,
मुझमें नहीँ बाकी  सबर…….!!!!

न कर सितम मुझपे सनम
ना सब्र का इम्तेहान ले,
गश खा रहीं हैं ख्वाहिशें,
खुश्क से हालात हैं,
नासाज होता मेरा हशर,
तू लौट आ मेरी जिंदगी
तेरे बिन
कटता नहीँ लम्बा सफ़र…..!!!!!

गर्त में है छुप रहा
तेरे बिन जीवन मेरा,
बंदिशे हों लाख ही
तुझको चाहूँ फिर भी मगर,
साँसे रहें या ना रहें
दिल की यही एक चाह है,
मुझमेँ तू मौजूद हो,
तेरा बनूँ मैं हर नजर
मेरा बने तू हमसफ़र……!!!!!



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