अभिनय या हकीकत

 कुछ लोग

रंगमंच पर करते हैं

अभिनय


और बखूबी उकेर कर

 रख देते हैं 

दुनिया भर के तमाम

 दुःख-दर्द-द्वेष-खुशी-करुणा-प्रेम

और न जाने

कितने ही अन्य भावों को


प्रशंसा के

हकदार बनते हैं

और पुरस्कार स्वरूप

न जाने क्या क्या जीत ले जाते हैं,


किंतु

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं

जो जीवन के

सैकड़ों तरह के 

झंझावात -अभाव - अपूर्णता- एकाकीपन

 जैसे तमाम पतझड़

अपने सीने में 

सकुशल दफ्न करने के बाद


अभिनय करते हैं

"खुश रहने का"

किंतु उनके अभिनय की

 कोई प्रशंसा नहीं होती


जबकि वो इतने 

कुशल अभिनेता होते हैं

कि एक उम्र बीत जाने तक

दर्शकों को एहसास नहीं 

होने देते

कि वो खुशनुमा हकीकत,

हकीक़त नहीं

बल्कि एक अभिनय मात्र था ।

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