मेरे जज्बात
आवारा एहसास
परिन्दों सी ख्वाहिशें,
ज़िन्दगी का तजुर्बा,
कुछ मेरी - कुछ तुम्हारी
कुछ यहाँ की - कुछ वहाँ की
कभी इसकी - कभी उसकी
न जाने किस-किस की।
वफा के मायने
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आज भी इतनी गुरबत बाकी है मुझमे,
कि बेवफा कह कर मै तुम्हारी तौहीन नही करुँगा,
.
हाँ,
ये कहना सही होगा कि तुम्हे वफा के मायने नहीँ पता शायद ....
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