अपना ख़्याल रखा करो

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मेरी ज़रूरतों पर ज़रा

नीयत-ए-हलाल रखा करो,

कि बेशकीमती हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख्याल रखा करो.......१


न जेहन में कोई शिकवा

न निगाह में कोई सवाल रखा करो,

कि मेरी अमानत हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख़्याल रखा करो.......२


अपने लब पे मेरा नाम

और मेरे होंठों पे अपना ज़माल रखा करो,

कि मेरी मोहब्बत हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख़्याल रखा करो.......३


हमारे रब्त में इफ्फत

और ज़हन में आज़-ए-विसाल रखा करो,

कि मेरी इबादत हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख़्याल रखा करो........४


अपने होंठों पर नाज़नीन हँसी

और ज़हन को खुश- हाल रखा करो,

कि मेरी हसरत हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख़्याल रखा करो........५


मेरे हांथो में हांथ अपने

और अब्स में अपने ग़ज़ाल रखा करो,

कि मेरी उल्फ़त हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख़्याल रखा करो.......६


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