मेरे जज्बात
आवारा एहसास
परिन्दों सी ख्वाहिशें,
ज़िन्दगी का तजुर्बा,
कुछ मेरी - कुछ तुम्हारी
कुछ यहाँ की - कुछ वहाँ की
कभी इसकी - कभी उसकी
न जाने किस-किस की।
love quotes
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the worlds best couple is who fights alot, arguements alot, but never let others enter in their personal life to disturb them and always with each other at the time when problems arises.
वो जिसके केश में हो गंग और हो वेश एक निहंग सा वो जिसका रूप हो अनंग और हो मन किसी विहंग सा..... वो जिसके कंठ में हो विष और ग्रीव-माल एक भुजंग सा हो गण में जिसके भूत - प्रेत मग़र स्नेह वाणी में सत्संग सा..... वो जिसके हस्त में त्रिशूल हो और क्रोध का उबाल हो हो सक्त भी, आसक्त भी किन्तु स्वरूप हो पावन उमंग सा..... वो जिसकी शक्ति का न अंत हो पर हो दंभ से विरक्त सा जो ख़ुद में सर्वकार हो दर्श में आनंद एक तरंग सा..... चर भी वो, है अचर भी वो है नारी भी वो और नर भी वो, वही सूक्ष्म है, वही तनु भी है वही पशुपति, परमेश्वर भी वो..... वो जो काल का भी काल हो हो छद्म फिर भी विकराल हो मद भी हो महेश्वर भी हो किन्तु भान सर्वकाल हो..... वो देव हो, महादेव हो समस्त सृष्टि का वो जैव हो वो निशि भी हो, हो रैन भी किन्तु कल्याण हो सर्वस्व का..... जो रक्त का पिपासु भी और जीवन का वो जिज्ञासु भी वो श्वास भी , वो मृत्यु भी शकल सृष्टि का अविनाशी भी..... हो वृषभ जिसका वाहन और पिशाच जिसके भ्रत्य हों जो चर-अचर हो ख़ुद में ही भ्रषंश ताण्डव जिसका नृत्य हो...... वही भूत है, भविष्य है वही ...
१ ये दायरे, ये बंदिशें किसी और पर थोपो मैं हवा का झोंका हूं मुझे आवारगी पसंद है.....!! २ इश्क -ओ -ऐतबार की बंदिशों में बंधकर रहना नहीं आता, मैं आवारा हवा हूं फजाओं की मुझको कहीं ठहरना नहीं आता.......!! ३ किसी को दौलत में किसी को शोहरत में तो किसी को बंदगी में मजा आता है, मैं बंजारा मजाज़ हूं, साहब मुझको बस आवारगी में मजा आता है......!! ४ खैरात में नहीं मिली मुझको ये मुफलिसी ये आवारगी, ये बेबाक लहज़ा, बहुत मशक्कत की है मैने खुद को इतना बरबाद करने के लिए.......!! ५ बहुत मुतासिर है तेरे हुकूक से वजूद मेरा, ऐ हवाओं मुझको इल्म दो तमाम बंदिशें मिटाने का......!!
तेरी खुशबू में लिपटे हुए कुछ खत गदगद हुए जाते हैं रखे हुए दराज में, तेरी ख़ामोशी में बिखरे हुए लिहाफ अब भी सिसकते हैं घर के किसी कोने में चुप सी आवाज़ में, तेरे मखमूर से बदन की मादक मुश्क लिए मेरी कमीज़ अब भी टंगी है किंवाड़ के पीछे, तेरे लरज़ते हुए सुर्ख होंठो का एहसास लिए हुए एक तौलिया अब भी गुमान करता है अपने हुसूल-ओ-कामरानी पे, तेरे गेसुओं का स्याह संदलापन लिए वो तकिए खूब गुरुर करते हैं तेरे बदन के छुअन की कामयाबी पर, हमारे लम्स की मदमस्त आहों की गवाह दीवारें खुद को कमजर्फ कहते हुए तुझे ढूंढती हैं ऐसे दौर - ए -खलवत में मेरे फजूल चुटकुलों पे तेरे कहकहों की आवाज लिए क्या क्या बाते गढ़ते हैं घर के कमरे सारे, और तेरी कुरबतों की उल्फतों का अथाह दरिया लिए खुदी बहती रहती है किसी बवंडर में.......!!
Hmmm true
ReplyDeletethankyou
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